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लाखों रूपए की चोरी कर फरार हुआ आश्रम का कोठारीआश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी यमुना पुरी ने दी सूचना पुलिस

Bystaruknews

Oct 12, 2025

लाखों रूपए की चोरी कर फरार हुआ आश्रम का कोठारी
आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी यमुना पुरी ने कराया मुकद्मा दर्ज
28 लाख नकद, रूद्राक्ष जड़ित सोने की चेन, चांदी की कटोरियां ले जाने का आरोप
हरिद्वार, 12 अक्तूबर। जगजीतपुर स्थित महामृत्युंजय मठ में चोरी का मामला सामने आया है। आश्रम के परमाध्यक्ष जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी यमुना पुुरी महाराज ने आश्रम के कोठारी पर 28 लाख रूपए नकद, रूद्राक्ष जड़ित सोने की चेन व चांदी की कटोरियां आदि चोरी कर फरार होने का आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर दी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। पुलिस की शुरूआती जांच पड़ताल में मिले एक सीसीटीवी फुटेज में आरोपी बैरागी कैंप की और जाता दिखाई दे रहा है।
स्वामी यमुना पुरी महाराज ने बताया कि उन्होंने मूलरूप से कस्बा बैसूम हस्तिनापुर यूपी के मूल निवासी विकास सिंघल को 2009 में सन्यास दीक्षा प्रदान की थी। सन्यास के बाद उसे वैराग्य पुरी नाम दिया गया। उन्होंने उसे अपना उत्तराधिकारी भी घोषित कर दिया था। आश्रम के लेन देन समेत सारी जिम्मेदारी वैराग्य पुरी ही संभालता था। उसके नाम से उन्होंने अपने आश्रम महामृत्युंजय मठ के बगल में ही एक आश्रम का निर्माण भी कराया है। स्वामी यमुना पुरी महाराज ने बताया कि वे 10 अक्तूबर की रात पंजाब से आश्रम लौटे थे। सवेरे सात बजे उनके फोन पर वैराग्य पुरी का मैसेज आया कि वह जा रहा है। पहले तो उन्हें कुछ समझ नहीं आया। जब उन्होंनें उसके कमरे में जाकर देखा तो आश्रम में चल रहे निर्माण कार्य के खर्च के लिए अलमारी में रखे रूपए, चेन व चांदी की कटोरियां गायब मिली। इसके बाद उन्होंने पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने पर पुलिस आश्रम पहुंची और जांच पड़ताल की।
स्वामी यमुना पुरी ने बताया कि वैराग्य पुरी आश्रम के नाम पर कई दुकानदारों और लोगों से भी लाखों रूपए ले गया है। पुलिस उसे जल्द से जल्द गिरफतार कर चोरी किया गया धन और अन्य सामान बरामद करे। महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरी एवं महामंडलेश्वर स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि पुलिस प्रशासन को आरोपी को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कड़ा दंड दिलाना चाहिए। जिससे अन्य कोई व्यक्ति इस प्रकार से विश्वासघात करने की कोशिश ना कर सके। इस दौरान स्वामी अनंतानंद, स्वामी ऋषिराज, स्वामी विवेकानंद गिरी, स्वामी नरेशानंद सहित कई संत मौजूद रहे।

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