सावन का आखरी सोमवार
आज सावन का आखिरी सोमवार है शिव मंदिरों में भोले शिव का जलाभिषेक करने के लिए भारी भीङ उमङ रही है आधी रात के बाद से ही हरिद्वार के तमाम शिवालयों में भक्तों की भीड़ जुटनी शुरू हो गयी थी जो सुबह होते होते लंबी लंबी कतारों में बदल गयी। मान्यता है की आज भगवान् का दक्ष नागरी कनखल में वास समाप्त हो गया और वे आज कैलाश लौट जाएंगे। यही कारण है की आज के दिन हर कोई भोले को प्रसन्न करने के लिए जलाभिषेक करता है और अगले वर्ष दोबारा आने की मनोकामना के साथ विदा करता है।
: ये नज़ारा है शिव की ससुराल दक्ष नगरी कनखल का। जहाँ भोले ने श्रावण के एक माह तक रहकर सत्ता का सञ्चालन किया। जयमाता के घर आने की ख़ुशी में हर साल जहाँ मंदिर को इसी तरह भव्य रूप में सजाया जाता है वहीँ भक्त भी भगवान् को भोले को प्रसन्न करने के लिए जलाभिषेक करने पहुँचते हैं। मान्यता है की इस समय सृष्टि का संचालन भगाएं शिव के हाथ में है। साढ़े तीन माह जब भगवान विष्णु राजा बली के यहाँ चोकीदार के रूप में हैं तो भगवन शिव ही सत्ता का सञ्चालन करते हैं और एक माह दिए गए वायदे के अनुसार दक्ष नगरी में रहता है
: सावन के अंतिम सोमवार के साथ ही श्रावण मॉस भी अपने समाप्ति की ओर है। तमाम शिवालयों में आने वाले भक्तों की सुरक्षा के लिए पुलिस प्रशासन ने भी पुख्ता इंतज़ाम किये हैं। हर भक्त भोले को अगले साल दोबारा बुलाने के लिए पुरी आस्था और श्रद्धा से विदा करना चाहता है।
