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हिन्दू-सनातन है विश्व का सबसे प्राचीनतम धर्म : संजयमायापुर बस्ती में आयोजित किया गया विराट हिन्दू सम्मेलन

Bystaruknews

Feb 3, 2026

हिन्दू-सनातन है विश्व का सबसे प्राचीनतम धर्म : संजयमायापुर बस्ती में आयोजित किया गया विराट हिन्दू सम्मेलन


हरिद्वार।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ हरिद्वार नगर के तत्वावधान में मायापुरी बस्ती क्षेत्र का एक विराट हिन्दू सम्मेलन सरस्वती विद्या मंदिर मायापुर के प्रांगण में मायापुर हिन्दू सम्मेलन आयोजन समिति द्वारा आयोजित किया गया। जिसमे क्षेत्र की जनता ने बढ़ चढ़ कर बड़ी संख्या में हिस्सा लिया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि गरीब दासीय आश्रम के संचालक भगवताचार्य स्वामी रविदेव शास्त्री ने सनातन धर्म की विशेषताएं बताते हुए हर व्यक्ति से अपनी परम्पराओं का पालन करने का आव्हान किया।
मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रान्त प्रचार प्रमुख संजय जी ने हिन्दू धर्म की प्राचीनता, गौरव, और उसकी गरिमामयी उपलब्धयों का वर्णन करते हुए हर नागरिक से अपने धर्म का पालन करने के साथ साथ राष्ट्र धर्म का पालन करने का भी आव्हान किया। उन्होंने की सबसे प्राचीन सनातन हिदू धर्म,परंपराएं है। विश्व के अन्य सभी धर्म सनातन से ही निकले है। भारत की धरती पर सिख,जैन, बौद्ध सहित सैकड़ों पथ सम्प्रदायएं है जिनका उद्देश्य विश्व में शांति व सबका कल्याण करना ही है। सनातन धर्म जोड़ने का भाव रखता है। प्रान्त प्रचार प्रमुख संजय जी ने संघ के शताब्दी वर्ष पर लिए गए पंच परिवर्तन का संकल्प दोहराते हुए कहा कि पर्यावरण,नागरिक कर्तव्य,स्व:बोध,कुटुंब प्रबोधन तथा समाजिक समरसता पर बल दिया।
सम्मेलन को विशिष्ट अतिथि साध्वी महंत गंगा दास जी ने भी सम्बोधित किया। इससे पूर्व सभी अतिथियों ने दीप प्रज्वालित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।
अंत मे कार्यक्रम के संरक्षक महंत विष्णु दास ने सभी का आभार व्यक्त किया। सम्मेलन का सफल संचालन चंद्र शेखर कुर्ल ने किया।
आयोजन समिति के संयोजक मुकेश जोशी, सहसंयोजक मनोज मंत्री, कोषाध्यक्ष समाजसेवी राकेश गोयल, एवं शिक्षा विद विजय पाल सिंह जी एवं करुणेश सैनी जी तथा वरिष्ठ भाजपा नेता प्रांतीय सहमडिया प्रभारी विकास तिवारी,मनोज मंत्री का भी उल्लेखनीय योगदान रहा।
सभा में पूर्व मेयर मनोज गर्ग, समाजसेवी जगदीश लाल पाहवा, दीपक शर्मा पार्षद, सचिन कुमार पार्षद मंजू रावत पार्षद, अपने साथियों के साथ सम्लित हुए। इसके बड़ी संख्या में क्षेत्र में संचालित संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया।

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