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लीलाधारी और अद्भूत चमत्कारी हैं भगवान श्रीकृष्ण-श्रीमहंत रविंद्रपुरी

Bystaruknews

Jul 7, 2025

लीलाधारी और अद्भूत चमत्कारी हैं भगवान श्रीकृष्ण-श्रीमहंत रविंद्रपुरी
हरिद्वार, 7 जुलाई। खड़खड़ी स्थित श्री निर्धन निकेतन आश्रम में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के पांचवे दिन श्रद्धालु भक्तों को संबोधित करते हुए आश्रम के परमाध्यक्ष स्वामी ऋषि रामकृष्ण महाराज ने कहा कि भगवान की भक्ति ही सबसे बड़ा धन है। सच्चे प्रेम से ही भगवान को पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा जीवन को प्रभु भक्ति से जोड़ती है। भगवान श्रीकृष्ण बिना मांगे ही अपने भक्तों की झोली भर देते हैं। सुदामा ने भगवान से कभी कुछ नहीं मांगा। लेकिन भगवान ने बिना मांगे ही उन्हें सबकुछ प्रदान कर दिया। श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने भक्तों को आशीवर्चन प्रदान करते हुए कहा कि संसार के हर भक्त के हृदय में वास करने वाले भगवान श्रीकृष्ण लीलाधारी और अदभूत चमत्कारी हैं। भगवान मुरलीधर को जिसने भी सच्चे मन से पुकारा उन्होंने उसका जीवन भवसागर से पार उतारा है। महंत राघवेंद्र दास महाराज ने कहा कि गंगा तट पर संत महापुरूषों के सानिध्य में भक्तों को परम् कल्याणकारी श्रीमद भागवत कथा के श्रवण का अवसर उपलब्ध कराने के लिए स्वामी ऋषि रामकृष्ण महाराज बधाई के पात्र हैं।
कथाव्यास महांडलेश्वर स्वामी शिवानंद महाराज ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि पृथ्वी ने गाय का रूप धारण कर श्रीकृष्ण को पुकारा तब वे पृथ्वी पर आये। इसलिए वह मिट्टी में नहाते, खेलते और खाते हैं, ताकि पृथ्वी का उद्धार कर सकें। गोपबालकों ने यशोदा माता से शिकायत कर दी कि मां तेरे लाला ने माटी खाई है तो माता यशोदा हाथ में छड़ी लेकर दौड़ी आयी और श्रीकृष्ण से मूंह खोलने को कहा। माता के कहने पर श्रीकृष्ण ने अपना मुख खोल दिया। श्रीकृष्ण के मुख खोलते ही माता यशोदा ने देखा कि मुख में चर-अचर सम्पूर्ण जगत विद्यमान है। यह देखकर माता को बड़ा विस्मय हुआ। श्रीकृष्ण ने सोचा कि मैया ने तो मेरा असली तत्त्व ही पहचान लिया है। यदि मैया को यह ज्ञान बना रहता है तो हो चुकी बाललीला, फिर तो वह मेरी नारायण के रूप में पूजा करेगी। न तो अपनी गोद में बैठाएंगी, न दूध पिलाएंगी और न मारेगी। जिस उद्देश्य के लिए मैं बालक बना वह तो पूरा होगा ही नहीं। श्रीकृष्ण की लीला के चलते यशोदा माता तुरन्त उस घटना को भूल गयीं।
कथा के मुख्य यजमान नरेंद्र कपूर परिवार, ट्रस्टी विजय सिंगला, जीवन गोयल, ज्ञानचंद व फकीरचंद ने भागवत पूजन किया और कथाव्यास से आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर प्रांश, नरेंद्र कपूर, राकेश कपूर, जीवन गोयल, विजय सिंगला, सुशील ढींगरा, राजेश शर्मा, मनोज, रजनी कुमार राजा, स्वामी राजेंद्रानंद, स्वामी रविदेव शास्त्री, महंत मोहन सिंह, महंत दुर्गादास, महंत तीरथ सिंह, स्वामी शिवम महंत, स्वामी हरिहरानंद, स्वामी दिनेश दास, स्वामी शिवानंद भारती सहित कई संत महंत और श्रद्धालु शामिल रहे।

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