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योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने की विधि नहीं है, यह हमारी सनातन संस्कृति का मूल है। अभिषेक वर्मा

Bystaruknews

Jun 15, 2025

योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने की विधि नहीं है, यह हमारी सनातन संस्कृति का मूल है। अभिषेक वर्मा

नई दिल्ली में 15 जून 2025 को आयोजित “योग महाकुंभ” कार्यक्रम ने योग साधकों शिक्षकों एवं समाजसेवियों का विशाल संगम प्रस्तुत किया। यह ऐतिहासिक आयोजन अखिल भारतीय योग शिक्षक महासंघ (ABYOGASMS Foundation) के तत्वावधान में लाजपत भवन ऑडिटोरियम में सम्पन्न हुआ।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे डॉ. अभिषेक वर्मा जी और उनकी सुपुत्री निकोल वर्मा आई।
जो एक सनातनी राजनीतिज्ञ और उद्योगपति के रूप में विख्यात हैं। कार्यक्रम का उद्घाटन वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ हुआ और पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
इस अवसर पर श्री अभिषेक वर्मा ने संबोधित करते हुए कहा कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने की विधि नहीं है, यह हमारी सनातन संस्कृति का मूल है।
भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं, “योगः कर्मसु कौशलम्”, यानि कर्म में कुशलता ही योग है।
वेदों में योग को आत्मा की शुद्धि और चित्त की स्थिरता का माध्यम बताया गया है।
आज जब दुनिया तनाव और भौतिकता से जूझ रही है, तब योग ही वह साधन है जो शरीर, मन और आत्मा को संतुलित करता है।
स्वस्थ भारत, संस्कारवान समाज, और आत्मनिर्भर राष्ट्र की कल्पना बिना योग के अधूरी है।
शिवसेना (NDA) और हमारे पथप्रदर्शक बाला साहेब ठाकरे जी हमेशा इस विचार के पक्षधर रहे कि राष्ट्र निर्माण आत्मनियंत्रण और संयम से ही संभव है, और योग उसका आधार है। हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने योग को वैश्विक मंच पर स्थापित किया, अंतरराष्ट्रीय योग दिवस इसका प्रमाण है। शिवसेना के पोर्टफोलियो में आयुष मंत्रालय, फिट इंडिया मूवमेंट, और डिजिटल योग अभियान योग को हर घर तक पहुँचा रहे हैं। आइए, संकल्प लें: योग अपनाएँ, जीवन सजाएँ, और भारत को फिर से विश्वगुरु बनाएँ। जय सनातन। जय हिंद।
विशिष्ट अतिथियों में राजर्षि वेदमूर्ति आचार्य पवन दत्त मिश्रा महाराज जी, स्वामी अमित देव जी, डॉ. ईश्वर तथा योग गुरु मंगेश त्रिवेदी शामिल रहे।
योग गुरु मंगेश त्रिवेदी जो ABYOGASMS के संस्थापक हैं ने कहा कि यह आयोजन योग को जन-जन तक पहुंचाने का एक बड़ा प्रयास है।

कार्यक्रम में विभिन्न योग संगठनों, विद्यालयों और संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और इसे एक महाकुंभ की भांति मनाया गया।

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