

गंगा संग दूध की होली हरिद्वार हुआ रंगीन देश भक्ति के रंग में रंगे मुल्तान समाज के लोग
हरिद्वार में इस बार मुल्तान जोत महोत्सव धूमधाम से मनाया गया दो साल से कोरोना के कारण ये महोत्सव सांकेतिक रूप से मनाया जा रहा था हर क़ी पौड़ी पर आज सतरंगा माहौल दिखाई दिया इस सतरंगे माहौल मे देश के अलग-अलग स्थानों से आकर मुल्तान समाज के लोगो ने हर क़ी पौड़ी के धार्मिक माहौल को रंगीन कर दिया वंही माँ गंगा के साथ भी जमकर दूध क़ी होली खेली और माँ गंगा की आराधना की साथ महोत्सव में आए मुल्तान समाज के लोगों देश का झंडा हाथों में लेकर देश भक्ति के रंग में रंग गए
सन 1911 में पकिस्तान में रहने वाले व्यापारी लाला रूपचंद ने पैदल आकर हरिद्वार में माँ गंगा में जोत प्रवाहित क़ी थी असल में लाला रूपचंद क़ी दस ओलाद थी लेकिन उनकी कोई भी ओलाद बच नहीं पाई एक दिन जब उनकी लड़की को गंभीर चोट लगी तो फिर उन्हे लगा क़ी उनकी यह ओलाद भी बच नहीं पायेगी फिर उन्हे किसी ने कहा क़ी अगर वे हरिद्वार पैदल गंगा माँ में जाकर जोत जलाएंगे तो गंगा मैया के आशीर्वाद से उनके दुःख दूर होंगे इस पर लाला जी मुल्तान से जोत को लेकर हरिद्वार आये थे और उनकी कामना पूरी हुई थी लाला रूपचंद के द्वारा शुरू क़ी गई यह यात्रा आज परम्परा का रूप ले चुकी है मुल्तान जोत महोत्व के रूप में मुल्तान समाज के लोग माँ गंगा से दूध की होली खेलकर देश और समाज की खुशहाली और गंगा माँ की रक्षा और गंगा को पवित्र रखने की कमाना कर रहे है
पाकिस्तान से शुरू हुई यह यात्रा में आज भले ही देश के अलग-अलग जगहों से आकर लोग हरिद्वार में इकठा होते हो लेकिन पहले कि तरह ही आज भी लोग लाला रूप चंद जी को याद करते हुए जोत महोत्सव को बड़ी धूम-धाम से मनाते है लाला रूप चंद क़ी उस पहल को आज परम्परा का रूप देने के लिए यंहा पहुँचते है और लाला रूप चंद ने भाईचारे और आपसी सोहार्द की जो मिशल कायम की थी उसे आज भी बरक़रार रखने का प्रयास किया जाता है
