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स्वामी कैलाशानंद गिरी ने किया शिव साधना का समापनमहादेव शिव ही संसार की उत्पत्ति और संहार के कारक हैं-स्वामी कैलाशानंद गिरी

Bystaruknews

Aug 9, 2025

स्वामी कैलाशानंद गिरी ने किया शिव साधना का समापन
महादेव शिव ही संसार की उत्पत्ति और संहार के कारक हैं-स्वामी कैलाशानंद गिरी
हरिद्वार, 9 अगस्त। श्रावण पूर्णिमा पर निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने गंगा तट पर पूजा अर्चना कर पूरे सावन माह की गयी विशेष शिव साधना का समापन किया। स्वामी कैलाशानंद गिरी प्रतिवर्ष पूरे सावन महीने दक्षिण काली मंदिर में एक आसन पर 22-23 घंटे बैठकर विशेष शिव साधना करते हैं। शनिवार को श्रावण पूणिॅमा पर उन्होंने श्री दक्षिण काली मंदिर घाट पर महादेव शिव का विशेष अभिषेक, गंगा पूजन, स्नान और पंचगव्य प्राशन कर साधना का समापन किया। इस दौरान कई संत महंत और श्रद्धालु भक्त मौजूद रहे।
साधना के समापन के उपरांत श्रद्धालु भक्तों को आशीर्वाद देते हुए स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज ने कहा कि देवाधिदेव महादेव शिव ही संसार की उत्पत्ति और संहार के कारक हैं। समस्त सृष्टि शिव से उत्पन्न होती है और उनमे ही समाहित हो जाती है। उन्होंने कहा कि स्वर्ग से आयी गंगा के वेग को अपनी जटाओं में संभालने वाले महादेव शिव अत्यन्त भोले हैं और अपने भक्तों पर सदैव कृपा करते हैं। सावन उनकी कृपा प्राप्त करने सबसे उत्तम अवसर है। सभी भक्तों को सावन में नियमपूर्वक शिव आराधना अवश्य करनी चाहिए। इससे परिवार का कल्याण होता है। सुख, समृद्धि और वैभव की प्राप्ति होती है।
महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद, स्वामी ऋषिश्वरानंद एवं भारत माता मंदिर के महंत स्वामी ललितानंद गिरी ने साधना पूर्ण होने पर स्वामी कैलाशानंद गिरी महाराज को बधाई देते हुए कहा कि संतों के जप तप से ही संसार का कल्याण होता है। कहा कि स्वामी कैलाशानंद गिरी की विशेष शिव साधना के फलस्वरूप देश और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। देशवासियों के कल्याण और प्रगति का मार्ग प्रशस्त होगा।
स्वामी कैलाशानंद गिरी के शिष्य स्वामी अवंतिकानंद ब्रह्मचारी ने सभी संत महापुरूषों का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया और कहा कि गुरूदेव हमेशा मानव कल्याण के लिए प्रयासरत रहते हैं। इस अवसर पर स्वामी रविदेव शास्त्री, महंत गोविंददास, स्वामी हरिहरानंद, महंत राघवेंद्र दास, स्वामी सुतिक्ष्ण मुनि, स्वामी शिवम महंत, स्वामी दिनेश दास सहित कई संत महंत मौजूद रहे।

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