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वृक्षों के बिना मानव जीवन असम्भव : डा. बत्रा

Bystaruknews

Jul 8, 2022

वृक्षों के बिना मानव जीवन असम्भव : डा. बत्रा

एस एम जे एन पी जी कालेज के प्राचार्य एवं हिमालय क्लब के अध्यक्ष डॉ सुनील कुमार बत्रा ने कहा कि धरती पर हमारे सबसे नजदीकी मित्र वृक्ष हैं, जब आप वृक्ष काटते हैं तो समझिए आप अपनी जीवन शक्ति पर प्रहार कर रहे हैं और अपनी ही परेशानियों को बढ़ा रहे हैं। यदि हम पोधों को उगायेंगे तो वे हमें आगे बढ़ायेंगे जो मानव कल्याण के लिए बहुत जरूरी है। हमें वृक्षों के महत्व को समझना होगा। ऋषि-मुनियों ने भी वृक्षों को सूर्य, चन्द्रमा, गंगा की तरह पवित्र मानकर इसकी पूजा करने का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि एक वृक्ष जितनी आक्सीजन अपने पूरे जीवन में देता है वह कई व्यक्तियों को जीवन दे सकता है। अतः वृक्ष लगाना व उनका संरक्षण करना बहुत आवश्यक है क्योंकि वृक्षों के बिना मानव जीवन असम्भव है। प्रकृति का संरक्षण ही भगवान शिव की सच्ची आराधना है। प्रकृति हमारी माँ है और उसके बिना हमारा अस्तित्व सम्भव नहीं है। यदि हम उसके विरूद्ध जायेंगे और अपने लालच की पूर्ति के लिए उसके ससांधनों का अंधाधुंध दोहन करेंगे तो हम अपने विनाश को निमंत्रण देंगे। यह विचार वयक्त करते हुए उन्होंने राज्य सरकार द्वारा निजी भूमि पर खड़े पेड़ काटने की अनुमति देने के प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने एवं सभी प्रासंगिक पहलुओं पर चिन्तन करने के लिए कहा है
कृषि भूमि पर कृषि उपज के लिए उगाये जाने वाले वृक्षों को काटने की अनुमति तभी दी जानी चाहिए जब उसी प्रकार का पौधारोपण उस भूमि पर किया जाना सुनिश्चित किया जाये तथा कृषि भूमि का उपयोग अन्य किसी व्यवसायिक गतिविधियों के लिए परिवर्तित नही किया जाये.
वृक्षों का मानव जाति के जीवन में बहुत अधिक महत्व है। वृक्षों का अस्तित्व हमारे जीवन और जीवनशैली दोनों से जुड़ा है। प्रकृति ने हमें अनेक प्रकार के वृक्ष और जड़ी बूटियाँ दी हैं, जो हमें प्राण वायु के रूप में आक्सीजन देते हैं।
पौधरोपण द्वारा ही जल संरक्षण एवं संवर्धन किया जा सकता है। हमारा वृक्षों के साथ बहुत गहरा व सुक्ष्म सम्बन्ध है। हमारे जीवन का प्रत्येक क्षण वृक्षों से सम्बन्ध रखता है। हमें विकास और पर्यावरण में संतुलन बनाकर चलना सीखना होगा . अत: मैं आप सभी से यह अपील करना चाहता हूं कि आप प्रत्येक एक पौधा रोपित करें एवं वर्षभर उसकी देखभाल करें तो आगामी कुछ वर्षों में पर्यावरण संरक्षण को एक नयी दिशा मिलेगी .

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