
स्मृति दिवस पर संत समाज ने किया गुरू अमरदास महाराज को नमन
गुरू अमरदास ने जगायी धर्म और अध्यात्म की अलख -महंत जसविंदर सिंह
गुरू अमरदास ने सती घाट से दिया सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ संदेश-महंत रंजय सिंह
हरिद्वार, 25 सितम्बर। सिख धर्म के तीसरे गुरु गुरु अमरदास महाराज के स्मृति दिवस पर कनखल स्थित तपस्थान गुरूद्वारा तीजी पातशाही में संत समाज और श्रद्धालु भक्तों ने उन्हें श्रद्धा पूर्वक नमन किया और उनके दिखाए मार्ग का अनुसरण करते हुए मानव कल्याण में योगदान का संकल्प लिया। गुरु अमरदास महाराज के स्मृति दिवस के साथ ही गुरूदारे के ब्रह्मलीन महंत साधु सिंह महाराज, महंत रणवीर सिंह महाराज और महंत जसविंदर सिंह सोढ़ी महाराज की पुण्यतिथी भी श्रद्धापूर्वक मनायी गयी। इस अवसर पर श्री गुरु ग्रंथ साहब के अखंड पाठ की अरदास की गई और भोग लगाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के कोठारी महंत जसविंदर सिंह महाराज ने कहा कि सिख धर्म के तीसरे गुरू गुरु अमरदास ने सती घाट पर तपस्या कर धर्म और अध्यात्म की अलख जगायी। गुरू महाराज ने तत्कालीन समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ जनजागरण करते हुए सती प्रथा जैसी सामाजिक कुरीति को बंद कराया। उन्होंने कहा कि सभी को गुरू अमरदास महाराज के दिखाए मार्ग का अनुसरण करते हुए मानव सेवा में योगदान करना चाहिए। महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरी महाराज ने कहा कि हिंदू धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने वाले गुरूओं ने हमेशा समाज का मार्गदर्शन किया। गुरुओं की वाणी हमेशा प्रासंगिक रहेगी। गुरूजनों का दिखाया मार्ग ही कल्याण का मार्ग है। गुरू अमरदास महाराज एवं ब्रह्मलीन गुरूओं को नमन करते हुए महामंडलेश्वर स्वामी सत्यश्रेयानंद गिरी महाराज ने कहा विद्वान संत ब्रह्मलीन महंत जसविंदर सिंह सोढ़ी ने हमेशा समाज के जरूरतमंद वर्ग की सहायता की और धर्म संस्कृति के संरक्षण में योगदान दिया। तीजी पातशाही तपस्थल गुरु अमरदास गुरुद्वारा के महंत रंजय सिंह महाराज ने सभी संत महापुरूषों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि त्याग और तपस्या की प्रतिमूर्ति.गुरू अमरदास महाराज महान समाज सुधारक थे। गुरु अमरदास महाराज ने अपने जीवनकाल में 22 बार हरिद्वार की यात्रा की और कनखल स्थित सती घाट पर तपस्या कर सामाजिक कुरीतियों का विरोध किया और समाजसेवा का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि पूज्य गुरूजनों के दिखाए मार्ग पर चलते हुए आश्रम की सेवा संस्कृति को निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है। बीबी बिनिंदर कौर सोढ़ी ने कहा कि गुरु अमरदास ने सामाजिक समरसता के लिए लंगर प्रथा की शुरुआत की और जातपात के बंधनों को तोड़ने में अहम भूमिका निभायी। बीबी विनिंदर कौर सोढ़ी, महंत रंजय सिह, समाजसेवी अतुल शर्मा व नीरव साहू ने सभी संत महापुरूषों का फूलमाला पहनाकर स्वागत किया। इस अवसर पर स्वामी ऋषिश्वरानंद, महंत दुर्गादास, महंत बिहारी शरण, स्वामी रविदेव शास्त्री, महंत सुतिक्ष्ण मुनि, महंत ओमप्रकाश शास्त्री, संत जगजीत सिंह, महंत खेम सिंह, महंत निर्भय सिंह, महंत नारायण दास पटवारी, स्वामी शिवानंद दास, महंत गोविंद दास, महंत मोहन सिंह, महंत सूरजदास, महंत अंकित शरण, महंत तीरथ सिंह, महंत प्रह्लाद दास, स्वामी सुतिक्ष्ण मुनि, स्वामी दिनेश दास, मनोज महंत, एडवाकेट अरविन्द शर्मा, पराग गुप्ता, एडवोकेट कुशलपाल सिंह चौहान, अमित वालिया, गौरीशंकर सहित सभी तेरह अखाड़ों के संत महंत, अनेक गणमान्य लोग और श्रद्धालु भक्त मौजूद रहे।
