• Thu. Feb 19th, 2026

Star uk news

अपना उत्तराखंड

श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के संतों ने मुख्यमंत्री से की असामाजिक तत्वों के अखाड़े में प्रवेश पर रोक लगाने की मांग

Bystaruknews

Jun 9, 2023

श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के संतों ने मुख्यमंत्री से की असामाजिक तत्वों के अखाड़े में प्रवेश पर रोक लगाने की मांग


हरिद्वार, 9 जून। श्री पंचायती अखाड़ा बड़ा उदासीन के मुखिया महंत दुर्गादास महाराज ने संतों के प्रतिनिधिमंडल के साथ मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर अखाड़़े में भूमाफियाओं और असामाजिक तत्वों के प्रवेश पर रोक लगाने और अखाड़े के संतों को सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। हरिद्वार आए मुख्यमंत्री से डामकोठी में मुलाकात के दौरान मुखिया महंत दुर्गादास महाराज

ने कहा कि कुछ भूमाफिया व असामाजिक तत्व अखाड़े के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप कर रहे हैं। अखाड़े में पंचपरमेश्वर सर्वोच्च हैं। भूमाफियाओं के साथ मिलकर अखाड़े के नियमों का उल्लंघन करने पर पंचपरमेश्वर ने कुछ संतों को अखाड़े से निष्कासित कर दिया है। इसके बावजूद अखाड़े की संपत्ति खुर्दबुर्द करने के प्रयासों में जुटे भूमाफिया और असामाजिक तत्व अखाड़े के अंदरूनी मामलों में हस्तक्षेप कर रहे हैं। जिसे लेकर संतों में भय बना हुआ है। उन्होंने कहा कि भूमाफिया और असामाजिक तत्वों के अखाड़ें प्रवेश और अंदरूनी मामलों में दखल पर रोक लगायी जाए और अखाड़े के संतों को सुरक्षा प्रदान की जाए। मुखिया महंत दुर्गादास महाराज ने बताया कि मुख्यमंत्री ने संतों को सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। श्री निर्मल पंचायती अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह महाराज ने कहा कि धार्मिक संपत्ति को खुर्दबुर्द नहीं होने दिया जाएगा। अखाड़े की परंपरांओं का निर्वहन करते हुए सनातन संस्कृति के प्रचार प्रसार में संत समाज अपना योगदान करता चला आ रहा है। लेकिन कुछ लोग अखाड़े की संपत्ति को कब्जाने की नीयत से प्रयास करते रहते हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ संत समाज को एकजुट होकर लड़ना होगा। एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि संतों ने मुख्यमंत्री को समस्या से अवगत कराया है। जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान महंत रूपेंद्र प्रकाश, महंत शिवानंद, महंत जयेंद्र मुनि, महंत गोविंददास, महंत अमनदीप सिंह, महंत प्रेमदास, महंत कैवल्यानंद आदि संत शामिल रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Sory