कांवड़ मेले में अनोखे रंग आधुनिकता के दौर में श्रवण कुमार आज भी है जिंदा देखिए इस वीडियो में
आधुनिकता के इस दौर में एक ओर जहां लोग अपने बुजुर्गों को वृद्धाश्रम भेज रहे हैं वहीं दूसरी ओर आज भी कुछ श्रवण कुमार ऐसे हैं जो अपने बुजुर्गों को कांवड से यात्रा कराने निकले हैं जी हां ये तस्वीर है गाजियाबाद के रहने वाले विकास गहलोत की विकास अपने माता पिता को कांवड पर बैठा कर सैकडों किलोमीटर का सफर पैदल ही तय करेंगे यात्रा में माता पिता उनका दर्द देखकर विचलित ना हो इसके लिए विकास गहलोत ने अपने माता-पिता की आंखों पर कपड़ा बाधा है जिससे वह यह देख ना सके आखिर क्यों विकास गहलोत के मन में आया अपने माता पिता को कावड़ में बैठाकर शिव का जलाभिषेक करने का जा रहे श्रवण कुमार अपने माता पिता के साथ इस रिपोर्ट में
चिलचिलाती धूप और सैकडों किलोमीटर के सफर की परवाह किये बगैर अपने बूढे माता पिता को कांवड पर बैठाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने निकले विकास गहलोत की ये तस्वीरें किसी फिल्म का सीन नहीं बल्कि इसी युग की हैं जिस युग में बुजुर्गों को उस समय वृद्धाश्रम भेज दिया जाता है शायद जब बुजुर्गों को अपने परिवार की सेवा और परवरिश की सबसे ज्यादा जरूरत होती है विकास गहलोत का कहना है कि में इस यात्रा के माध्यम से उन लोगों को दिखाना चाहता हूं जो माता पिता की सेवा नहीं करते उनको भी पता लगे श्रवण कुमार आज भी है मेरे मन में काफी समय से था कि मैं अपने माता-पिता को कावड़ में बैठाकर यात्रा करू इनका कहना है इस यात्रा में मेरे द्वारा अपने माता-पिता की आंखों पर कपड़ा बाधा है जिससे वो मेरी पीड़ा ना देखें और भावुक हो जाए फिर में यात्रा नहीं कर पाऊंगा क्योंकि कोई भी माता पिता अपने बेटे का दर्द नहीं देख सकते इस यात्रा को करके मुझे काफी खुशी का अनुभव हो रहा है

आधुनिकता के इस दौर में अपने बेटे के रूप में श्रवण कुमार को पाकर विकास गहलोत के माता पिता भी काफी खुश है विकास गहलोत के पिता बृजमोहन गहलोत का कहना है कि भगवान शिव ही जानते हैं मेरे बेटे द्वारा जो कार्य किया जा रहा है विकास ने हमें कहा था कि में एक दिन आपको और माता जी को कावड़ में बैठाकर यात्रा कराऊंगा आज मेरे बेटे द्वारा अपना वादा निभाया गया इसकी हमें काफी खुशी है हम भगवान शिव से प्रार्थना करते हैं कि हमारे बेटे की यात्रा को सफल हो और हर मनोकामनाएं भगवान शिव हमारे बेटे की पूरी करें पैदल ही अपने माता पिता को कांवड पर बिठाकर सैकडों किलोमीटर का सफर कर रहे विकास गहलोत उन लोगों के लिए प्रेरणादायी हैं जो अपने परिजनों को अकेला छोड देते हैं हम भी विकास गहलोत को सलाम करतेे हैं और आशाा करते सभी विकास गहलोत की तरह अपने माता पिता के लिए श्रवण कुमार जरूर बने
