

स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने मोटा अंबाजी मन्दिर के शिलान्यास एवं जीर्णोद्धार कार्यक्रम, बोरीवली, मुंबई में किया सहभाग स्वामी चिदानन्द सरस्वती
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने बेरीवली, मुंबई स्थित मोटा अंबाजी मन्दिर के शिलान्यास एवं जीर्णोद्धार कार्यक्रम में सहभाग कर भक्तों और श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुये कहा कि यह दिव्य मंदिर आस्था, श्रद्धा और आध्यात्मिकता का केन्द्र बनें तथा संस्कृति और संस्कारों से जुडने और जोड़ने का केन्द्र बनें.
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने देशवासियों को अक्षय तृतिया की शुभकामनायें देते हुये कहा कि आज के दिन ही सतयुग और त्रेतायुग की शुरूआत हुई थी इसका अर्थ यह हुआ की हम पुनः सतयुग की ओर बढ़ रहे हैं। शक्ति की उपासना और शक्ति की आराधना ही सतयुग की शुरूआत है और वर्तमान समय में भारत को ऐसी ही दिव्य शक्ति चाहिये, अब भारत को महाभारत नहीं बल्कि महान की जरूरत है। आज धर्म की स्थापना के लिये युद्ध की नहीं बल्कि बुद्ध की जरूरत है।
स्वामी जी ने कहा कि महाराष्ट्र की धरती से ही थे हमारे छत्रपति शिवाजी जिन्होंने शक्ति की उपासना से ही महाशक्ति का अभ्युदय किया। आज के दिन नर-नारायण, हयग्रीव और परशुराम जी का अवतरण हुआ। हमारे पंडितों ने अपने हाथों में परसा तो नहीं उठाया परन्तु पवित्रता का हथियार अपने हाथों में रखकर संस्कृति को जागृत रखा। वर्तमान समय में हमारे राष्ट्र में उन्नति हो; विकास हो परन्तु संस्कारों के साथ हो क्योंकि ऐसा विकास ही जीवन में प्रसाद पैदा करेगा। अब समय आ गया है कि हम सदभाव के साथ आगे बढ़ते रहें। हमारी शक्ति और संस्कृति दूसरों के विकास हेतु अग्रसरित होती रहें यही संदेश हमारे मन्दिर हमें प्रदान करते हैं। स्वामी जी ने युवाओं को संदेश देते हुये कहा कि अपने मूल्यों से जुड़ों और अपने मूल से जुड़ों; जब भी मिले, जिससे भी मिले दिल खोल कर मिले यही संस्कृति हमारे शास्त्र और मन्दिर हमें सिखाते हैं.
स्वामी जी ने कहा कि संस्कृति और संस्कारों के विकास के लिये भारत के प्रत्येक व्यक्ति को भामाशाह बनना होगा और अपने धन का प्रसाद धर्म के लिये लगाना होगा। हमारे जीवन की यात्रा निर्माण की यात्रा हो; शान्ति की यात्रा हो। आज का दिन आप सभी के लिये अक्षय वरदान लेकर आये; यह अवसर आपको भीतर की यात्रा पर लेकर जाये। इस कार्यक्रम का सकुशल आयोजन एवं संयोजन पुष्कर भाई, कुमार भाई, अश्विनी भाई ने किया।
