• Sun. Oct 4th, 2026

Star uk news

अपना उत्तराखंड

श्राद्ध पक्ष में क्यों खिलाया जाता है कौवों और गायों को भोजन, कैसे मिलता है पितरों का आशीर्वाद, जानिए इस पर क्या बोले अंशुल श्री कुंज तीर्थ पुरोहित

Bystaruknews

Oct 4, 2026
अंशिका सिंह की रिपोर्ट

श्राद्ध पक्ष में क्यों खिलाया जाता है कौवों और गायों को भोजन, कैसे मिलता है पितरों का आशीर्वाद, जानिए इस पर क्या बोले अंशुल श्री कुंज तीर्थ पुरोहित

हरिद्वार। सनातन धर्म में श्राद्ध पक्ष के 16 दिन अपने पितरों को याद करने का समय है। श्राद्ध पक्ष में पितरों को कौवे और गाय को भोजन कराने की परंपरा है। शास्त्रों के अनुसार कौवे पृथ्वी लोक के साथ ही आकाश लोक में भी विचरण करते हैं। इसलिए कौवों को दिया गया भोजन सीधा पितरों को प्राप्त होता है। इसी प्रकार गाय में 33 करोड़ देवी देवताओं का वास माना गया है। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार कौवे और गाय को भोजन कराने से पितरों को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। श्राद्ध पक्ष के दौरान हरिद्वार में गंगा घाटों, मंदिरों और आसपास के क्षेत्रों में लोग कौवों और गायों को भोजन कराते नजर आ रहे हैं। लोग घरों में बनाए गए पकवानों और भोजन का कुछ हिस्सा पितरों के निमित्त निकालकर पहले कौवे और गाय को खिलाते हैं। इसके ही ब्राह्मणों को भोजन कराने और दान पुण्य की परंपरा भी निभाई जाती है। धर्माचार्यों के अनुसार कौवों और गायों को भोजन कराने से पुण्यफल की प्राप्ति होती है।

गायों का महत्व

तीर्थ पुरोहित पावन घाम के महामंत्री अंशुल श्री कुंज ने बताते हैं कि श्राद्ध पक्ष में ब्राह्मणों को भोजन कराने के साथ ही पंचबली निकालने का विधान है। शास्त्रों के अनुसार पांचवली का अर्थ श्वान(कुत्ता), गाय, चींटी, कौवा और देवी देवताओं जैसे भगवान विष्णु और मां गंगा के लिए भोजन निकाला जाता है। उन्होंने बताया कि गाय में 33 करोड़ देवी देवताओं का वास होता है। यदि कोई पितृ अधोगति में भटक रहा है, तो मनुष्य रूप में जन्म लेने से पहले वो गाय के गर्भ में ही आता है। उसके बाद अपने कुल में उसका पुनः जन्म होता है। इसलिए श्राद्ध पक्ष में गायों को हरा चारा, रोटी, चोकर, गुड़ और नमक खिलाया जाता है। इस प्रकार शास्त्रों में लिखा है कि गाय को भोजन कराने से पितृ अधोगति से मुक्त हो जाते हैं और उन्हें शांति मिलती है। इस प्रकार गाय हमारे सभी कष्टों को हरने वाला पशु है, जिसे हिंदू धर्म में माता का दर्जा दिया गया है।

कौवों को भोजन कराने का महत्व

कौवा एक अद्भुत पक्षी है, यह दोनों आयामों अर्थात पृथ्वी लोक और आकाश लोक में विचरण करता है। यदि कोई हमारे पितृ नभचर में भटक रहे हैं तो कौवों के माध्यम से वो भोजन उन पितरों को भी प्राप्त हो जाता है। कौवा मनुष्यों के आसपास रहने वाला पक्षी है, इसलिए शास्त्रों में कौवों को भोजन कराने का महत्व बताया गया है।

क्या मानना है स्थानीय लोगों काललित नैय्यर का कहना है कि

श्राद्ध पक्ष चल रहे हैं और इन दिनों कौवों को रोटी और अन्न का दान करना शुभ माना जाता है। वो पिछले पांच सालों से कौवों को रोटी और दाना पानी देते आ रहे हैं। इससे सभी काम शुभ होते हैं और पितरों का आशीर्वाद भी मिलता है।

शास्त्रों में पढ़ा है कि कौवे को पितरों का प्रतीक माना जाता है और गाय सनातन धर्म में माता के रूप में पूजनीय है। इसी कारण हम लोग गाय और कौवे को भोजन इत्यादि देते है, इससे पुण्यफल की प्राप्ति होती है।

हरिद्वार में 22वीं डिस्ट्रिक्ट यूथ बास्केटबॉल चैंपियनशिप का शुभारंभ, डीपीएस स्कूल रानीपुर के प्रिंसिपल रहे मुख्य अतिथिडिस्ट्रिक्ट बास्केटबॉल एसोसिएशन के अध्यक्ष ललित नैय्यर ने कहा कि जिले में बास्केटबॉल को बढ़ावा देने और स्कूल स्तर पर नई प्रतिभाओं को सामने लाने के लिए चैंपियनशिप का आयोजन किया जा रहा
महानिर्वाणी अखाड़े में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया कपिल मुनि षष्ठी पर्वभगवान कपिल मुनि का दर्शन भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर- अध्यक्ष अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद रजिस्टर श्रीमहंत रविन्द्र पुरी
इंडियन रेडक्रॉस उत्तराखण्ड के चेयरमेन प्रो.(डॉ.) नरेश चौधरी को पुलिस विभाग को दिये गये उत्कृष्ट सहयोग एवं सराहनीय संचालन के लिये किया गया सम्मानित

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You missed

Sory